मातृभूमि पर लेसन प्लान | हिंदी (पद्य) पाठ योजना – B.Ed / D.El.Ed

मातृभूमि पर लेसन प्लान

हिंदी (पद्य) की पाठ योजना
प्रस्तुत मातृभूमि पर लेसन प्लान हिंदी विषय के अंतर्गत पद्य पाठ – “मातृभूमि” के अध्यापन हेतु तैयार की गई है। मातृभूमि कविता विद्यार्थियों में देशप्रेम, त्याग, कर्तव्यबोध एवं राष्ट्रीय भावना का विकास करती है। इस पाठ योजना का उद्देश्य छात्रों को कविता के भावार्थ, भाषा सौंदर्य तथा कवि के भावों से परिचित कराना है। शिक्षण प्रक्रिया में वाचन, भाव स्पष्टिकरण, प्रश्नोत्तर एवं चर्चा विधि का प्रयोग किया गया है, जिससे विद्यार्थी कविता को सरलता एवं रुचिपूर्वक समझ सकें।

मातृभूमि पर लेसन प्लान

विद्यालय का नाम: [अपनी स्कूल का नाम व स्थान लिखें]
कक्षा- 6/7 कालांश- 4
विषय- हिंदी (वसंत) वर्ग- A
दिनांक- __________ अवधि- 30 मिनट
प्रकरण- मातृभूमि (कविता)

शिक्षण के उद्देश्य :-

क्र.स. शिक्षण उद्देश्य अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन
1. ज्ञानात्मक 1. विद्यार्थी कविता के नवीन शब्दों का प्रत्याभिज्ञान कर सकेंगे।
2. विद्यार्थी कविता के केंद्रीय भाव का प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।
2. अवबोध 1. विद्यार्थी मातृभूमि की विशेषताओं की व्याख्या कर सकेंगे।
2. विद्यार्थी प्राकृतिक सौंदर्य के आधार पर काव्य पंक्तियों का वर्गीकरण कर सकेंगे।
3. अभिरुचि 1. विद्यार्थियों में देशप्रेम और काव्य पाठ के प्रति रुचि विकसित होगी।

शिक्षण विधियाँ- व्याख्यान विधि, सस्वर वाचन विधि

सहायक सामग्री- लपेट फलक, चॉक, डस्टर एवं भारत के मानचित्र तथा प्राकृतिक सौंदर्य (हिमालय, नदियाँ) को दर्शाता चार्ट।

पूर्वज्ञान– विद्यार्थी अपने देश और उसकी कुछ भौगोलिक विशेषताओं के बारे में सामान्य जानकारी रखते हैं।

प्रस्तावना :-
क्र. स. छात्राध्यापक क्रियाएं छात्र क्रियाएं
1. हमारा जन्म जिस भूमि पर होता है उसे क्या कहते हैं? जन्मभूमि या मातृभूमि
2. भारत के उत्तर में कौन सा महान पर्वत स्थित है? हिमालय पर्वत
3. हिमालय से निकलने वाली किन्हीं दो पवित्र नदियों के नाम बताइए? गंगा, यमुना
4. कविता ‘मातृभूमि’ के भावार्थ के बारे में आप क्या जानते हैं? समस्यात्मक

उद्देश्य कथन :-

विद्यार्थियों आज हम ‘मातृभूमि’ कविता के माध्यम से अपनी जन्मभूमि के गौरव और उसके प्राकृतिक सौंदर्य का विस्तार पूर्वक अध्ययन करेंगे।

प्रस्तुतीकरण :-

शिक्षण बिन्दु छात्राध्यापक क्रियाएं (विस्तार से) छात्र क्रियाएं श्यामपट्ट कार्य
1. कविता का आदर्श वाचन क्रिया: छात्राध्यापक कविता की पंक्तियों “ऊँचा खड़ा हिमालय, आकाश चूमता है…” का उचित आरोह-अवरोह और भाव के साथ पाठ करेंगे।

व्याख्या: कवि कहते हैं कि हमारे देश के उत्तर में विशाल हिमालय अडिग खड़ा है जो मानो आकाश को स्पर्श कर रहा है। दक्षिण में समुद्र (सिंधु) निरंतर इसके चरणों को धो रहा है।

विद्यार्थी ध्यानपूर्वक पाठ सुनेंगे और भाव को समझेंगे। हिमालय = उत्तर में
सिंधु (समुद्र) = दक्षिण में
2. प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन क्रिया: छात्राध्यापक चार्ट की ओर संकेत करते हुए “गंगा यमुना त्रिवेणी, नदियाँ लहर रही हैं…” पंक्तियों की व्याख्या करेंगे।

व्याख्या: कवि के अनुसार भारत की भूमि पर गंगा, यमुना और सरस्वती (त्रिवेणी) जैसी नदियाँ बहती हैं, जिनकी छटा निराली है। यहाँ के बाग-बगीचे अमराइयों (आम के बागों) से लदे हैं जहाँ कोयल कूकती है।

विद्यार्थी अपनी उत्तर पुस्तिका में मुख्य शब्द नोट करेंगे। नदियाँ: गंगा, यमुना
अमराइयाँ: आम के बाग
शिक्षण बिन्दु छात्राध्यापक क्रियाएं (विस्तार से) छात्र क्रियाएं श्यामपट्ट कार्य
3. मातृभूमि के विविध रूप क्रिया: छात्राध्यापक “वह पुण्य-भूमि मेरी, वह स्वर्ण-भूमि मेरी…” पंक्तियों के माध्यम से देश के प्रति सम्मान का भाव जागृत करेंगे।

व्याख्या: यह भूमि केवल मिट्टी नहीं है, यह हमारी पुण्य-भूमि (पवित्र), स्वर्ण-भूमि (समृद्ध) और जन्म-भूमि है। यहाँ के झरने, पहाड़ और पक्षी इस धरा को स्वर्ग जैसा सुंदर बनाते हैं।

छात्र देशप्रेम के भाव को आत्मसात करेंगे। भारत: पुण्य-भूमि, स्वर्ण-भूमि

मूल्यांकन प्रश्न :-

1. हिमालय भारत की किस दिशा में स्थित है? __________

2. कविता में ‘अमराइयाँ’ का क्या अर्थ बताया गया है?

3. ‘त्रिवेणी’ किन नदियों के संगम को कहा जाता है?

4. दक्षिण में भारत के चरणों को कौन झूमता (धोता) है? __________

गृहकार्य :-

मातृभूमि कविता का सारांश अपने शब्दों में लिखिए और अपनी पसंद की किन्हीं चार पंक्तियों का भावार्थ स्पष्ट कीजिए।

इस मातृभूमि पर लेसन प्लान के माध्यम से विद्यार्थियों ने मातृभूमि कविता के भाव, उद्देश्य एवं संदेश को भली-भांति समझा। कविता के अध्ययन से विद्यार्थियों में देशभक्ति, राष्ट्रीय चेतना एवं नैतिक मूल्यों का विकास हुआ। प्रश्नोत्तर एवं मौखिक मूल्यांकन से यह स्पष्ट हुआ कि विद्यार्थी कविता के भावार्थ और संदेश को आत्मसात करने में सफल रहे। इस प्रकार यह मातृभूमि पर लेसन प्लान विद्यार्थियों के भावनात्मक एवं नैतिक विकास में सहायक सिद्ध होती है।

अंततः कहा जा सकता है कि मातृभूमि पर लेसन प्लान हिंदी पद्य अध्यापन को प्रभावी एवं रोचक बनाती है। यह लेसन प्लान शिक्षक एवं बीएड प्रशिक्षुओं के लिए teaching practice, lesson demonstration एवं परीक्षा तैयारी के लिए उपयोगी है। सुव्यवस्थित शिक्षण चरणों के माध्यम से कविता का अध्ययन सरल एवं प्रभावी बनता है, जिससे विद्यार्थियों में भाषा कौशल के साथ-साथ राष्ट्रप्रेम की भावना भी विकसित होती है।

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