विज्ञान शिक्षण में विद्यार्थियों की जिज्ञासा, सक्रिय सहभागिता और वैचारिक समझ को विकसित करना अत्यंत आवश्यक है। परंपरागत शिक्षण विधियों में छात्र प्रायः निष्क्रिय रहते हैं, जिससे सीखने की प्रक्रिया प्रभावी नहीं हो पाती। इसी समस्या का समाधान 5E मॉडल (5E Model in Science Teaching) प्रदान करता है। यह मॉडल निर्माणवादी (Constructivist) सिद्धांत पर आधारित है और विद्यार्थियों को सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनाता है।
5E मॉडल के पाँच चरण—Engage, Explore, Explain, Elaborate और Evaluate—विज्ञान की अवधारणाओं को सरल, रोचक और स्थायी बनाने में सहायक होते हैं। इस लेख में हम विज्ञान शिक्षण में 5E मॉडल के उपयोग, उसके चरणों और महत्व को विस्तार से समझेंगे।
विज्ञान शिक्षण में 5E मॉडल का उपयोग – 5E Model in Science Teaching in Hindi
परिचय
विज्ञान शिक्षण का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में जिज्ञासा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, अवलोकन कौशल और समस्या-समाधान क्षमता विकसित करना होता है। पारंपरिक शिक्षण पद्धतियाँ केवल तथ्य-प्रदर्शन पर आधारित होती हैं, जिससे विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी कम होती है। इसी समस्या के समाधान के लिए 5E मॉडल (5E model in science teaching) विकसित किया गया। यह रचनावादी (Constructivist) सिद्धांत पर आधारित एक शिक्षण मॉडल है, जिसमें विद्यार्थी अपने पूर्व ज्ञान के आधार पर नई अवधारणाएँ स्वयं निर्मित करते हैं और सक्रिय भागीदारी के माध्यम से सीखते हैं।
5E मॉडल के पाँच चरण— Engage, Explore, Explain, Elaborate और Evaluate — विज्ञान शिक्षण को रोचक, प्रभावी और विद्यार्थी केंद्रित बनाते हैं।
5E मॉडल का अर्थ (meaning of 5E model in science teaching)
5E मॉडल एक शिक्षण पद्धति है जिसमें प्रत्येक “E” एक चरण को दर्शाता है:
- Engage (सक्रिय करना)
- Explore (अन्वेषण करना)
- Explain (व्याख्या करना)
- Elaborate (विस्तार करना)
- Evaluate (मूल्यांकन करना)
यह मॉडल विज्ञान विषय में अवधारणात्मक स्पष्टता और कौशल विकास दोनों पर ध्यान देता है।
1. Engage चरण(5E model in science teaching)
अर्थ:
इस चरण में शिक्षक विद्यार्थियों की रुचि जगाने, पूर्व ज्ञान को सक्रिय करने और विषय को रोचक बनाने का प्रयास करता है।
उद्देश्य:
- जिज्ञासा उत्पन्न करना
- पूर्व ज्ञान से संबंध स्थापित करना
- ध्यान केंद्रित करना
उदाहरण (विज्ञान विषय):
जल चक्र पढ़ाने से पहले शिक्षक एक प्रश्न पूछ सकता है— “बारिश कैसे होती है?”
या
एक छोटा वीडियो दिखाया जा सकता है।
2. Explore चरण (5E model in science teaching)
अर्थ:
विद्यार्थी अपने अनुभवों और गतिविधियों के माध्यम से अवधारणाओं की खोज करते हैं।
उद्देश्य:
- हाथों से काम करने का अवसर
- अवलोकन और प्रयोग कौशल विकसित करना
- समस्याओं को वैज्ञानिक तरीके से समझना
उदाहरण:
चुंबकत्व पढ़ाते समय विद्यार्थी स्वयं चुंबक और वस्तुओं को छूकर देखते हैं कि कौन-सी वस्तुएँ आकर्षित होती हैं।
3. Explain चरण (5E model in science teaching)
अर्थ:
इस चरण में विद्यार्थी अपने अवलोकन प्रस्तुत करते हैं और शिक्षक आवश्यक वैज्ञानिक व्याख्या देकर अवधारणा स्पष्ट करता है।
उद्देश्य:
- वैज्ञानिक भाषा से अवधारणाओं को स्पष्ट करना
- गलतफहमियों को दूर करना
- अवधारणाओं की सही समझ विकसित करना
उदाहरण:
विद्यार्थियों द्वारा प्रयोग के बाद शिक्षक बताता है कि लोहे, निकेल आदि धातुएँ चुंबकीय होती हैं।
4. Elaborate चरण (5E model in science teaching)
अर्थ:
इस चरण में विद्यार्थी नई अवधारणाओं को वास्तविक जीवन परिस्थितियों या उन्नत गतिविधियों में लागू करते हैं।
उद्देश्य:
- सृजनात्मक सोच का विकास
- ज्ञान का व्यावहारिक उपयोग
- उच्च स्तरीय सोच कौशल (HOTS)
उदाहरण:
चुंबकत्व की अवधारणा सीखने के बाद विद्यार्थियों से पूछा जाए कि स्पीकर, कंपास या इलेक्ट्रिक बेल कैसे काम करते हैं।
5. Evaluate चरण (5E model in science teaching)
अर्थ:
इस चरण में विद्यार्थी की सीख को विभिन्न गतिविधियों या परीक्षणों के माध्यम से आंका जाता है।
उद्देश्य:
- यह जानना कि विद्यार्थी ने क्या और कितना सीखा
- सुधारात्मक फीडबैक देना
- सतत मूल्यांकन
उदाहरण:
वर्कशीट, क्विज़, मौखिक परीक्षण, मॉडल निर्माण, प्रयोगात्मक रिपोर्ट आदि।
5E मॉडल की विशेषताएँ (5E model in science teaching)
- विद्यार्थीकेंद्रित शिक्षण पद्धति
- हाथों से सीखने पर जोर (Learning by Doing)
- अवधारणाओं की गहरी समझ विकसित करता है
- सक्रिय सहभागिता को बढ़ाता है
- वैज्ञानिक दृष्टिकोण और जिज्ञासा का विकास
- रचनावाद आधारित — ज्ञान का निर्माण स्वयं विद्यार्थी करते हैं
- सभी कक्षाओं में उपयोगी—प्राथमिक से उच्च माध्यमिक तक
5E मॉडल की सीमाएँ (5E model in science teaching)
- समय अधिक लगता है
- बड़े वर्ग में गतिविधियाँ करना कठिन
- संसाधनों की आवश्यकता
- सभी अध्यापकों को प्रशिक्षण नहीं मिलता
- मूल्यांकन बहु-आयामी होने से जटिलता बढ़ती है
विज्ञान शिक्षण में 5E मॉडल का महत्व (5E model in science teaching)
- जटिल वैज्ञानिक अवधारणाएँ भी सरल हो जाती हैं
- विद्यार्थियों में प्रयोग एवं अवलोकन कौशल विकसित होते हैं
- वैज्ञानिक दृष्टिकोण और समस्या-समाधान क्षमता का विकास
- सीख सतत, गहरी और जीवन से जुड़ी होती है
- शिक्षार्थियों का आत्मविश्वास बढ़ता है
- गलत धारणाएँ (Misconceptions) स्वतः दूर हो जाती हैं
उदाहरण: 5E मॉडल द्वारा ‘जल चक्र’ का शिक्षण
Engage:
बारिश का वीडियो दिखाना और प्रश्न पूछना।
Explore:
काँच के जार में पानी गर्म कर के छोटे स्तर पर जल चक्र का मॉडल बनाना।
Explain:
वाष्पीकरण, संघनन, वर्षा की अवधारणा समझाना।
Elaborate:
पूछना— “अगर वातावरण गर्म हो जाए तो वर्षा पर क्या असर पड़ेगा?”
Evaluate:
वर्कशीट, जल चक्र का लेबल्ड चित्र बनवाना।
निष्कर्ष
5E मॉडल विज्ञान शिक्षण को रुचिकर, व्यावहारिक और प्रभावशाली बनाता है। यह न केवल विद्यार्थियों की समझ को गहन करता है, बल्कि उन्हें सक्रिय शिक्षार्थी बनाता है। हर वह विज्ञान शिक्षक जो अपने विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और कौशल विकसित करना चाहता है, उसे इस मॉडल का प्रयोग अवश्य करना चाहिए। आधुनिक शिक्षा में 5E मॉडल एक प्रभावी, संरचनात्मक और नवोन्मेषी शिक्षण पद्धति के रूप में उभरकर सामने आया है।
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